वन औषधि एक परम्परा है। वन में निवासी खेतीहर (आदिवासी) पीढ़ियों से इन औषधियों का ज्ञान रखते आये हैं। इन जडीबुटियों को हम प्राथमिक उपचार स्वरूप ले सकते हैं। किसी को साँप या बिच्छू ने काँटा तो उनका ज़हर मरीज़ के शरीर में ये जडीबुटियां चढने नहीं देती है। कैंसर तथा सोरायसिस आदि चमड़ीकी बीमारियाँ ज़माने से प्रचलित हैं। उनका चलन पहले कम मात्रा में था क्यों कि आज के जैसे तब डिब्बा बन्द (प्रीज़र्वज्ड) फूड के लोग आदि नहीं थे।